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आरज़ू....

उसको पाने की शायद उम्मीद थी कोई, बरहां राह तका करते थे, उसकी बातें, उसकी आवाज़ उसकी बेबाक अदा, रात दिन याद किया करते थे। एक एक सांस उसके नाम किया, क्या कहें कितना प्यार करते थे। अब तो आलम है, शाम से पहले, याद चरागों की जला लेते हैं, वो लौट आए एक बार फिर कभी, इस आरज़ू में जिए जाते हैं। निरुपमा (21.1.22)

आलापेर भाषा, आदोरेर भाषा, श्वोपनेर भाषा।

तोमर भाषा शीखे, आमी आर ऐकटा भाषा शीखेनीलाम, आलापेर भाषा, आदोरेर भाषा, श्वोपनेर भाषा। तुमि ऐक बारी आमाके बोले छिले, आमी तोमार शुधु तोमारी आछी, तोमारी थाकबो शेई बोला तोमार कोथा, आमी हृदोए माझे रेखे छी, आर आमी जानी ना, कोनो लोकेर भाषा, आर आमी जानी ना कोनो ओन्नो गान शुधू तोमार तान, शुधू तोमार भाषा। आदोरेरभाषा तोमार आलापेर भाषा निरुपमा(18.1.22)

लाज़मी नही कुछ भी....

लाज़मी नही कुछ भी.... न आरज़ू, न इश्क़, न छुअन, न चुभन। लाज़मी नही कुछ भी..... न तसव्वुर, न ख़्वाब, न थकन न टुटन। लाज़मी नही कुछ भी,  न तुम, न मैं, न वहशत, न तकमील। निरुपमा(18.01.2022)

ख्वाहिशें.....

अनगिनत ख्वाहिशों से भरी ये जिंदगी, ख्वाहिशें कुछ पूरी होती, कुछ अधूरी दम तोड़ती। ख्वाहिशों के पीछे दौड़ते हम और तुम, न कभी बिछड़ते न मिल ही पाते। दूर बहुत पीछे से आती कुछ आवाजें, गूंजते से कुछ चेहरे, देर बहोत देर तलक,  जगाते हैं रातों को। ख्वाहिशों की पोटली है, जाने कब खुलेगी,  जाने कब ख़त्म होगी! निरुपमा (18.11.2021)

याद......

  हर बात याद है, या सबकुछ भूल गए! वो आवाज़, वो हंसी, वो शरारत, वो अंदाज... हर बात याद है, या सबकुछ भूल गए! आज फिर एक बार टटोला दिल को, आज फिर एक बार दिल में उतरे हैं। अपनी उंगलियों से हौले हौले कुरेदा है, फिर उसी ज़ख्म को देखने उतरे हैं। और देखा, हर बात याद है अब भी, हर बात याद है। वो आवाज़, वो हंसी, वो शरारत, वो अंदाज... निरुपमा(11.11.2021)