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लाज़मी नही कुछ भी....


लाज़मी नही कुछ भी....
न आरज़ू, न इश्क़, न छुअन, न चुभन।
लाज़मी नही कुछ भी.....
न तसव्वुर, न ख़्वाब, न थकन न टुटन।
लाज़मी नही कुछ भी, 
न तुम, न मैं, न वहशत, न तकमील।
निरुपमा(18.01.2022)

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शायद ख़ुद की तलाश में।

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The Solitude

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