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बस यूंही

मैंने तीली से जलाकर बुझाया,
बुझाकर जलाया,
ढूंढ़ा उन नज़रों को अपने रू - ब- रू,
और पाया,
उजाले की चमक में वो खो गया,
पास आ गया, 
जब अंधेरों की महफ़िल लगी।

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