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क्यूं हैं, पता नहीं!

 हम दोनो दूर हैं बहोत, क्यूं हैं, पता नहीं! हम दोनो पास थे कभी, क्यूं थे, पता नहीं! रस्ता तुम्हारा छोड़ आए हम,  रुख एक दूसरे से मोड़ आए हम, दिल के हर अरमान कुचल डाले अपने हाथों से, डूबता छोड़ आए माज़ी को अपने हाथों से, दिल अब भी बेकरार है, क्यूं है, पता नहीं। निरुपमा (28.7.23)

withdrawal....

 Its a withdrawal from a love relationship,  from a journey of warmth, of love, from unnecessary emotional breakdowns, From tears of happiness tears of sorrows. It's a withdrawal from own happiness, own smile, a dream of togetherness. It's a withdrawal from you, from my breathe, from my heart beat, from my life. It's a love withdrawal, withdrawal from life. Nirupama (8/7/2023)

बस यूं ही.....

और चलते चलते कदम ठिठक कर ठहर जाते हैं, जैसे आवाज़ कोई सुनी हो तुम्हारी,  जैसे झलक दिख जाए कहीं।  जैसे शोर के बीच सुकून की वो निगाह पड़ी हो मुझपर,  जैसे हौले से हाथ पकड़कर मेरी पेशानी पर एक बोसा रखा हो तुमने। के जब कि मुझको भी ये ख़बर है के तुम नहीं हो, कहीं नहीं हो, पर ये दिल कह रहा है, तुम यहीं हो... यहीं कहीं हो।। निरुपमा (14.5.23)

फैसलों की घड़ी ...

बस, फैसलों की घड़ी थी अब, न वो मेरा था, न मैं ही राह में खड़ी थी अब। अब जो छूटा, सब छूटता चला गया, मैंने भी इस दिल की, कब सुनी थी अब। दिल को कुछ कहना था, कोई नाम गुनगुनाना तो था, दिल की ना सुनूंगी, इस बात पर मैं अड़ी थी अब। तन्हाई की राह, बेहद तन्हा.. बेहद मुश्किल थी मगर, बस इसी राह पर चलने की अपनी ठनी थी अब। निरुपमा (14.12.22)

एक मुलाक़ात ....

 न हाथ थामा, न नजरें मिलाई, न गिले किए, न शिकवे को दरकिनार किया। अपने-अपने अना की बात थी, वो भी ख़ामोश रहे हम भी खामोश रहे। निरुपमा (27.9.2022) अना (गुरूर) self respect...