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बस यूं ही.....

और चलते चलते कदम ठिठक कर ठहर जाते हैं, जैसे आवाज़ कोई सुनी हो तुम्हारी, 

जैसे झलक दिख जाए कहीं। 

जैसे शोर के बीच सुकून की वो निगाह पड़ी हो मुझपर, 

जैसे हौले से हाथ पकड़कर मेरी पेशानी पर एक बोसा रखा हो तुमने।

के जब कि मुझको भी ये ख़बर है के तुम नहीं हो, कहीं नहीं हो,

पर ये दिल कह रहा है, तुम यहीं हो... यहीं कहीं हो।।

निरुपमा (14.5.23)

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शायद ख़ुद की तलाश में।

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The Solitude

एक संपूर्ण जीवन, एक एक पल, एक एक दिन की पैदाइश होती है दिन सुलझा हुआ आता है सामने,  जब सुबह सकारात्मक होती है,  सुबह की सकारात्मकता,  हमारे मन के स्वस्थ्य पर आधारित होता है,  हम जितने अकेले होते जाते हैं, उतने गहरे तैरते हैं ख़ुद में,  किसी का साथ होना, बाह्य रूप से ख़ुद से जुड़ना है,  पर अकेले होना, आंतरिक रूप से ख़ुद से जुड़ना,  निरुपमा (10/4/2025)