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चंद अशआर

चंद रिश्तों के नाम नहीं हुआ करते,
उनके जुड़ने की पर चर्चा बहुत होती है..

मुझको मेरे घर का रस्ता बता ज़रा,
मैं खुद को शायद कहीं तुझमें भूल आई हूँ..

Comments

  1. बहुत खूब ... खुद को तुझमे भूलना ही तो प्रेम है ...

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शायद ख़ुद की तलाश में।

          आज फ़िर अकेलेपन ने घेर लिया मुझको, सांसों के लय में कोई समानता नहीं, इसके सुर-ताल बिगड़े हुए हैं। ये धड़कने मेरे कानों तक पहोचकर कोहराम मचाए हों जैसे। एक थकावट चारों ओर से घेरे हुए है, हाथ पैर हिलते नहीं, शरीर जैसे जड़ हुआ जाता है, नज़रें पहरों तक झुकी रहती हैं, एक टकटकी लगाए, पत्थर सी। मैं फ़िर से दौड़ना चाहती हूँ, हंसना चाहती हूँ, खिलखिलाना चाहती हूँ, पर अकेलापन मुझे और भी अधूरा किये जाता है। मालूम नहीं ये क्यूँ है! या शायद मालूम करना भी नहीं चाहती।               उम्र के हर दहलीज़ से गुज़र कर देखा, कई बार रस्ते बदलकर देखा, हर उम्र ने हर रस्ते ने मेरा हाथ थामकर कहा, थम जाओ ज़रा, ठहर कर देखो तो ज़रा ख़ुद को, क्या हाल कर लिया तुमने अपना। एक हल्की सी भीगी पलकों पर मुस्कान लिए, फ़िर से निकल पड़ती हूँ उस राह पर, जाने किसकी तलाश में, शायद ख़ुद की तलाश में।  निरुपमा (2/6/25) 

थोड़ा सा रूमानी...

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माँ

बुजुर्गों को हँसते हुए देख बहुत अच्छा लगता है, कभी उनसे कोई छोटा सा सवाल करो, और उसका वो बहुत लंबा सा जवाब देते हैं, उस वक़्त उनके चेहरे को देखते हुए उनकी बातें सुनना कुछ अलग सा ही महसूस होता है, माँ कहती हैं ‘अब चलने में तकलीफ होती है, घुटने में दर्द रहता है, आँखों से दिखता भी कम है’ पर जब मुझे ऑफिस आने में देर हो रही होती है तो देखते देखते मेरे लिए टिफिन बना देती हैं, सीर्फ मेरी ख़ुशी के लिए वो चौथे महले तक चढ़ मेरे घर आ जाती है। बचपन में ही मेरी दादी नानी का साया मेरे सिर से उठ गया। इसलिए अनेकों कहानियां सुनाने का जिम्मा मां ने अपने सिर ले लिया। उनकी सुनाई हर कहानी आज भी ज़ुबानी याद है। जाने कितने जप, जाने कितनी पूजा, मां दिन रात आज भी जागकर करती है। जब भी उससे पूछा 'कुछ ला दूं तुम्हारे लिए मां' उसने अक्सर मेरे ही हाथ में कुछ पैसे थमा दिए और कहा 'तू अपने लिए कुछ नहीं करती, अपने लिए ले आ' । मां से जब भी पूछा, ‘माँ, बाबूजी से तुमको कोई शिकायत नहीं?’ तो वो कहती हैं, ‘तुम्हारे बाबूजी ने मुझे तुम जैसी प्यारी बेटियाँ दी, मुझे और क्या चाहिए था!’ कितनी अजीब बात है न, एक औरत...