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कुछ भी नहीं ठहरता..,

 कुछ भी नहीं ठहरता,

न दिन न रात,

न हवा न पानी,

न मौसम न बरसात,

न खुशबू न रंग,

न दर्द न घुटन,

न प्यार न नफ़रत,

न शिकवे न गिले,

न ग़म न उदासी,

न मौन न चीख,

और जान......

हम भी कहां ठहरेंगे

न तुम न हम।

निरुपमा(27.8.20)


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