हाल-ए- दिल बयां करते हैं हम लिखकर
कलम छीन ले कोई, तो हम बेज़ुबाँ हो जाएं।
निरुपमा (30.4.24)
ज़िन्दगी के सफहों को पलटते हुए, कुछ ख़ास पल जैसे हाथ पकड़कर रोक लेना चाहते हैं!
हाल-ए- दिल बयां करते हैं हम लिखकर
कलम छीन ले कोई, तो हम बेज़ुबाँ हो जाएं।
निरुपमा (30.4.24)
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