Wednesday, July 31, 2013

बस यूँ ही.....

जब भी मिलता है, जीने की दुआ देता है,
क्या कहूँ कैसी वो बद्दुआ देता है...

मुझे तुम्हारे साथ चलना है,
कुछ देर
कुछ दूर,
कुछ वक़्त ही सही....

खुद को तुझसे दूर रखने की 
हर मुमकिन कोशिश तो की लेकिन,
हर बार तेरे चौखट पर
 
ये दिल लेकर आया मुझे.....

वो....

वो कहता है.. प्रेम है तो स्वीकार करो,
मैं सोचती हूँ, प्रेम बिना ही जीवन पार करूँ,
वो कहता है प्रेम होना सामान्य है,
मैं सोचती हूँ, क्या मेरा प्रेम मान्य है!
वो कहता है, ज़िन्दगी चार दिनों की है..खुश रहो,
मैं सोचती हूँ, दो और दिन जीना अभी बाकी है!
वो कहता है, उसने भी प्यार किया था, वो जानता है,

मैं सोचती हूँ, क्या मेरे दिल का हाल वो पहचानता है!

Monday, July 29, 2013

‘हम’ ‘तुम’

हर रिश्ते के दो सिरे थे,
एक ‘हम’ और एक ‘तुम’
जब ‘हम’ ने पकड़ मजबूत की,
तो ‘तुम’ ने पकड़ ढीली छोड़ दी,
वो रिश्ता चलता रहा फिर भी,
बनता रहा, पलता रहा,

लेकिन हमारे साथ ठीक उल्टा हुआ..
जब हमने पकड़ मजबूत की तब तुमने भी मजबूत की,
और जब मजबूरियों ने हमने पकड़ ढीली छोड़ी,
तब तुमने मुझे छोड़ दिया...........

Tuesday, July 23, 2013

बस यूँ ही.....

मैंने एक हाथ में कागज़ थामा, 
दूजे में कलम,
पल गुज़रा, दिन गुज़रे,
अब तो एक अरसा हुआ,
तुम्हारा नाम लिखना न आया मुझे,
तुम्हे याद करना न आया मुझे,
तुम्हे भूल पाना भी न आया मुझे,
तुम्ही कोई तरकीब सिखाओ, 
या तो पा लूँ तुम्हे या तो मर जाऊं......

Saturday, July 20, 2013

सिर्फ मेरे ...बस एक तुम..

सुनो.........रात के करीब ग्यारह बजे हैं.....मैं तुम्हारे काँधे पर सर रखे सफ़ेद चादर पर नीले आसमान के तले लेटी हूँ, तुमने सफ़ेद कुरता पायजामा पहन रखा रखा है और मैंने सफ़ेद साडी लाल किनारे वाली पहनी है, मेरे बाल खुले हैं, मांग में तुम्हारे नाम का सिन्दूर और माथे पर बड़ी सी लाल बिंदिया है....मैं और तुम बेहद व्यस्त हैं कि हमारे पास कोई काम नहीं उस नीले आकाश को देखने के सिवाहवाएं हौले हौले हमें छूकर गुज़र रही है.....विविद भारती से ‘घर’ फिल्म के गाने ‘फिर वही रात है’ की आवाज़ आ रही है....तुम मुझपर झुकते हो, तुम्हारी आँखों में शरारत होठों पर मुस्कान है..मेरी आँखें बंद हैं और होंठ कांप रहे हैं कि अचानक ही बादलों की ओंट से चाँद मुस्कुराकर झांकता है.....हमारी नज़रें मिलती हैं एक दुसरे से और तुम मुझे कसकर भर लेते हो अपनी बाहों में.....


हाँ ये भी तुमसे जुड़े ख्वाब का एक हिस्सा है...      

Wednesday, July 17, 2013

ज़िन्दगी एक है जो गुजरती ही नहीं,
वक़्त एक है जो थमता ही नहीं,
एक तुम हो....बहुत याद आते हो,

एक हम है, कुछ भूलते ही नहीं....