Wednesday, June 29, 2011

सिफ़ारिश

आज तुम चाँद से सिफ़ारिश करना,
अपने मिलने की ख्वाइश... ज़ाहिर करना,
गर वो पूछे तो कहना उस से,
मैंने तारों को समेटा है अपने आँचल में,
और ज़मीं पे बनाया है एक छोटा सा घर,
उसी घर में गुजारेंगे हम 'वो पल',
जिनको पाने की तमन्ना है दिल में सदियों से,
तेरे तारे भी गवाही देंगे, 
अपने ही आसमान के आगे,
अपनी कलियों को खिलाएंगे हम ,
इस पत्थर जहान के आगे,
आज तुम चाँद से सिफ़ारिश करना,
अपने मिलने की ख्वाइश... ज़ाहिर करना,

Friday, June 24, 2011

तन्हाई


कैसी  उलझी हुई सी ज़िन्दगी है,
कैसे बेमाने से हर पल हैं,
इस दर्द की कोई इन्तेहाँ नहीं,
जिस दर्द को तनहा जीती हूँ मैं!

कैसे हर पल में एक उदासी है,
जैसे शाम की आँख भी प्यासी है,
इस शाम की कोई सुबह नहीं,
जिस शाम में तनहा रोती हूँ मैं,

कैसे जीवन ये उदास हो गयी,
जैसे सब खाली हुआ मैं प्यासी रह गयी,
इस प्यास की कोई सीमा नहीं,
जिस प्यास से तनहा लड़ती हूँ मैं,

Wednesday, June 22, 2011

मुझको चाँद बुलाते थे तुम

उम्मीदों के दिये जलाकर,
मेरी दुनियां में हंस गा कर 
यादों को महकाते थे तुम 
मुझको चाँद बुलाते थे तुम 

कोरे से मेरे जीवन में,
अंधियारे से नील गगन में
सावन बन बरस जाते थे तुम,
मुझको चाँद बुलाते थे तुम

तन्हा रातों में उम्मीद की,
फूल ही फूल खिलाते थे तुम,
मुझको चाँद बुलाते थे तुम

जब कोई तारा टूटेगा,
हर सपना पूरा तब होगा,
ऐसा कह बहलाते थे तुम,
मुझको चाँद बुलाते थे तुम

Thursday, June 9, 2011

खो जाते हैं

आओ आज खुद को भुलाते हैं,
कुछ इस कदर एक दुसरे में खो जाते हैं,
तुम मेरी बांह  थामना, मैं तुम्हारे चेहरे को,
तुम उलझे मेरे लट सुलझाना, मैं तुम्हारी उलझनों को
फिर से मिलके कुछ ख्वाब सजाते हैं,
कुछ इस कदर एक दुसरे में खो जाते हैं,
ज़िन्दगी ने तो ग़म ही दिए, और हासिल कुछ न हुआ,
सुबह का नकाब ओढ़े, रात ने बस भुलावा दिया
खुशियों की लहर  एक और बार बहाते हैं,
उलझनों से दूर, दिल की दुनिया बसाते हैं,
आओ आज फिर खुद को भुलाते हैं,
कुछ इस कदर एक दुसरे में खो जाते हैं,


Tuesday, June 7, 2011

सबब

मेरी उदासी का सबब मुझसे जो पूछते हैं, कितने अनजान हैं वो अपने ही गुनाहों से!

Friday, June 3, 2011

एक दिन

आज तुम्हारी  आवाज़ सुनके ऐसा लगा जैसे बरसों बाद ये आवाज़ सुन रही हूँ, तुम वही हो मैं भी वही, फिर वो क्या है जो हमारे बीच बदल गया है! हाँ कुछ तो बदला है, कुछ तो है जो मुझे तुम्हारी दूरी का एहसास दिला रहा है!

कुछ साल पहले एक शाम यूँहीं मुस्कुराकार तुमने अपने एहसास ज़ाहिर किये थे, खुशबू सी फ़ैल गयी थी मेरे चरों ओर, खुद में ही गुम होने लगी थी, रास्ते अनजाने थे मगर, अपने से लगने लगे थे, रोज़ मिलना, बातें करना सबकुछ कितना अच्छा सा लगने लगा था! ज़िन्दगी के तो मानो मायने ही बदल गए थे, एक शख्स, जो सीर्फ आपका है, ये एहसास कितना अच्छा लगने लगा था!

और फिर एक दिन………तुम्हारा साथ हमेशा हमेशा के लिए छूट गया!

कल शाम देर तक यूँही सागर किनारे खली पाँव मैं चलती रही, सागर की लहरें मेरे पाँव को छूती, मचलती और फिर चली जाती थी, ऐसा लगा जैसे तुम यहीं कहीं मेरे आसपास हो, उन लहरों ने अकेलेपन का वो एहसास और भी गहरा कर दिया जो मैं कहीं पीछे छोड़ आई थी, उन् एहसासों की वजह को भूल जाना चाहती थी………..

Wednesday, June 1, 2011

नवाज़ दे

एक ज़िन्दगी मिली मुझे,
तेरे साथ वो न गुज़र सकी,
मुझे एक रात नवाज़ दे,
फिर मौत आए तो गम नहीं!