Tuesday, January 10, 2012

दोष


बारबार  ना  चाहते  हुए  भी  मैं  सोचने  पर  मजबूर  हो  जाती  हूँ….क्या  ये  दोष  मेरे  नाम  का  है? या  मेरी  किस्मत  का? या  के  कुछ  और  है  ये? जो  शायद  मेरी  समझ  से  पड़े  है! 

कभी  कभी  रास्ते  कितने  भी  बदलो  वो  मंजिल  नहीं  मिलती  जिसकी  तलाश  होती  है! और  उसके  ना  मिलने  पर  एक  खालीपन  कहीं  घर  कर  जाता  है, जिससे जितना पीछा छुड़ाना चाहो वो और जकड़ता है! चांदनी! हाँ …… बाबूजी ने  यही नाम रखा था मेरा, पर नाम रखते  वक़्त  एक  बार  भी  क्यूँ  नहीं  सोचा, के  चांदनी  का  अस्तित्व  तो  चाँद  के  बिना  अधूरा  है….वो  तो  बस  दूसरों  को  रोशन  करती  है, वो  भी  चाँद  से रौशनी  उधार  लेकर, उसकी  अपनी  ज़िन्दगी  तो  तनहा  होती  है,! उसे  ये  ग़लतफहमी  होती  है  के  वो  चाँद  की  है! लेकिन  अमावास  की  रातों  में  तो  चाँद  छुप  जाता  है, चांदनी  इस  नीले  आकाश  में  उसे  ढूंढती  फिरती  है …लेकिन  चाँद  को  तो  कोई  अपने  बाजुओं  में  कसकर  अपने  साथ  ले  जाता  है! चांदनी  की  एक  बार  भी फ़िक्र  नहीं  होती  तब  चाँद  को, चाहे  चाँद, चांदनी  को  ख़ुद  से  अलग  रखने  में  कामयाब  हो  जाए, लेकिन  चांदनी का  जीवन  तो  अर्थहीन  हो  जाता  है  चाँद  के  बिना!

ये  सूनी  आँखें  किसको  तलाशती  हैं, ये  फैली  बाहें  किसको  पुकारती  हैं, ये  जिस्म, जो  मिटटी  में  मिलना  है  एक  दिन, इसमें  छुपा  ये  छोटा  सा  दिल, किसके  नाम  पे  धड़कता  है, मुस्कुराता  है, कौन  है  जो  आज  भी  कहीं, हाँ …. बस  यहीं  कहीं, दिल  के  एक  छोटे  से  कोने  में  बसता  है …मेरी  आवाज़  जो  होठों  से  बाहर  निकलती  नहीं ….अन्दर  ही  अन्दर  किसका  नाम  पुकारती  है ….कबतक  ….कबतक  तुम  ख़ुद  को  दूर  रखोगे  मुझसे! कभी  तुम्हे  मेरी  याद  नहीं  आएगी???? कबतक  मैं  जलती  रहूंगी  इस  आग  में! कबतक  ये  सांस  यूँही  चलती  जाएगी! सासें  भी  चलती  हैं  जैसे......इन्हें  तो  बस  आदत  है  चलते  जाने  की! पर  मैंने  सुना  है  आदतें  तो  बदली  जा  सकती  है?? पर  क्यूँ  रूकती  नहीं  मुझसे  ये  सासें, के  जब  के  मैं  ये  जानती  हूँ …के  इन्  साँसों  के  आने  जाने  के  साथ  तुम्हारी  याद  आएगी! और  याद  आएँगे  वो  ज़ख्म  जो  ज़िन्दगी  ने  मुझको  दिए! हाँ  दोष  तो  ज़िन्दगी  को  ही  दूंगी! तुम्हे दोष  दे  के  क्या  पाऊँगी!