Saturday, November 30, 2013

बस यूँ ही...



"यूँ तो इश्क करने के लिए वजहों की ज़रुरत नहीं,
तूने हर रोज़ पर मुझको एक नयी वजह से नवाज़ा है.."


"तेरा दर दर-ए-खुदा तो है मगर,
तेरे दीदार को वजू की ज़रुरत तो नहीं"

"हर चेहरा अब दोहरा नज़र आता है,
तेरी बेवफाई में ज़िन्दगी से  यकीन उठ गया"

"दिल का हर दर्द अब आँखों में नज़र आता है,
वक़्त के साथ हर नकाब उतर जाता है"

"नम आँखों को काजल से छुपा रखा है,
होंठ पर अपने मुस्कान सजा रखा है,


हाथ में मेहंदी का शौख नहीं है मुझको,
सख्त लकीरों को बस इनमें छुपा रखा है"



"दिल उन्ही के हाथों अपना नीलाम हुआ,

कि जिनको दिल का हम ठेकेदार समझते थे" 



Wednesday, November 27, 2013

अकारण



शांत, सादा...स्वप्न अकारण,
दर्द, आंसू.....चाह अकारण,
घोर प्रतीक्षा.....प्रेम अकारण,
दुःख, दुर्भाग्य....भाग्य अकारण,
सत्य, परीक्षा....जीवन अकारण,
बेबस, लाचार....मृत्यु अकारण.