Monday, March 27, 2017

आज वो कोई नहीं मेरा, और मैं नहीं उसकी..

आज वो कोई नहीं मेरा, और मैं नहीं उसकी,
अपनी हर सांस जो, मेरी साँसों से बांधे रखता था,
अपनी परछाई से ज़्यादा, जो मुझको पास रखता था,
एक भी पल मुझ बिन, सदियों सी जिसको लगती थी,
वो जो कहता था, कि एक तुम हो और कोई नहीं..
आज वो कोई नहीं मेरा, और मैं नहीं उसकी..

उसकी एक आवाज़, मेरी रूह को छू जाती थी,
उसकी आँखों की तपीश, मेरे जिस्म को  पिघलाती थी,
उसके होंठों पर एक मुस्कान सजाने के लिए,
मैं कभी खुद ही उसकी तकदीर से लड़ जाती थी..

आज वो कोई नहीं मेरा, और मैं नहीं उसकी..

Thursday, March 9, 2017

बस यूँही...

"तुम क्या फ़िरे अपनी ज़ुबान से,
ज़िन्दगी से भरोसा उठ गया......"

"गुज़रे हर अफ़सोस पर ये अफ़सोस भरी परा,
तुम्हारी याद बाकी थी, उस से भी हाथ धोना पड़ा...."

"कुछ पल खामोशियों के बीच गुज़री,
कुछ पल तन्हाइयों के बीच गुज़री,
गुज़री तो कई शाम यूँ भी मगर,
वो शाम तेरे साथ.....तेरे बगैर गुज़री ...."