Saturday, November 17, 2012

माँ

बुजुर्गों को हँसते हुए देख बहुत अच्छा लगता है, कभी उनसे कोई छोटा सा सवाल करो, और उसका वो बहुत लंबा सा जवाब देते हैं, उस वक़्त उनके चेहरे को देखते हुए उनकी बातें सुनना कुछ अलग सा ही महसूस होता है, माँ कहती हैं ‘अब चलते में तकलीफ होती है, घुटने में दर्द रहता है, आँखों से दीखता भी कम है’ पर जब मुझे ऑफिस आने में देर हो रही होती है तो देखते देखते मेरे लिए टिफिन बना देती हैं, सीर्फ मेरी ख़ुशी के लिए वो चौथे महले तक चढ़ मेरे घर आई, कल रात ‘रश्मिरथी’ सुना रही थी! और सुनाते वक़्त उसकी आँखों में एक खास चमक थी, जब भी माँ से पूछती हूँ, ‘माँ, बाबूजी से आपको कोई शिकायत तो नहीं?’ तो वो कहती हैं, ‘तुम्हारे बाबूजी ने मुझे तुम जैसी प्यारी बेटियाँ दी, मुझे और क्या चाहिए था!’

कितनी अजीब बात है न, एक औरत जिसका पति अठारह साल पहले जा चुका  है, वो औरत जो अपने पति को परमेश्वर की तरह पूजती थी, वो उसके बगैर अब भी जीती है, हंसती है, खुश होती है!

सच मुझे उसकी हंसी के सामने किसी भी विश्व सुंदरी की मुस्कान फीकी लगती है!

चेहरे पर झुर्रियां समेटे,
होठों पर मुस्कान बिखेरे,
हाथों की घिस गयी रेखाएं,
बालों पे सफेदी लहराए,
छोटे छोटे दर्द पे मेरे,
आँखें उसकी मोती बिखेरे,
सबसे सुन्दर सबसे प्यारी,
है वो मेरी माँ
रातों को जागा करती थी,
मेरे लिए तारे गिनती थी,
भूके पेट कई बार ही सोयी,
बाबूजी से छुप छुप कर,
खूब बताशे लाया करती थी,
दुनिया से बस अलग सी है वो
मेरी प्यारी माँ!

1 comment:

  1. आज सुबह माँ पूछ रही थी, "छठ पर गाँव चली जाऊं?" मैंने मना कर दिया, तबियत बिलकुल भी ठीक नहीं है उनकी। अगले साल खुद ले कर जाऊँगा आपको। बस इतना ही कह सका।

    ReplyDelete